Tuesday, 13 October 2020

Health tips

  स्वास्थ्य से संबंधित कुछ विशेष जानकारियां


1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।

2- कुल 13 अधारणीय वेग हैं

3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है

4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।

5- 80 रोग चाय पीने से होते हैं।

6- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।

7- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।

8- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।

9- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है।

10- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।

11- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।

12- बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।

13- दूध(चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।

14- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।

15- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।

16- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्क हो हानि पहुँचती है।

17- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है।

18- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।

19- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।

20- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।

21- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।

22- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।

23- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।

24- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।

25- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।

26- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है।

27- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी,

सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औषधियां हैं।

28- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।

29- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।

30- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।

31- जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएंआदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।

32- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।

33- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।

34- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।

35- भोजन पकने के 48 मिनट के

अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोषकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।। 

36- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोषकता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।

37- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।

38- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड , समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।

39- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।

40- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते।

41- सरसों, तिल,मूंगफली , सुरजमुखी या नारियल का कच्ची घानी का तेल और देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और

वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।

42- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।

43- खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।

44- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।

45- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।

46- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए।

47-बर्तन मिटटी के ही प्रयोग करने चाहिए।

48- टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे।

(आँखों के रोग में दातून नहीं करना चाहिए)

49- यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़ें और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है।

50- निरोग रहने के लिए अच्छी नींद

Tuesday, 26 November 2019

Snoring (खर्राटे) Treatment in Ayurveda

  • खर्राटे ( Snoring)
खर्राटे लेने की समस्या आजकल इतनी सामान्य हो गई हैैं की लोगो ने इसे बीमारी मानना ही छोड़ दिया हैं। रात को सोते समय खर्राटे आना एक गंभीर समस्या हैं। खर्राटे लेने वाले को भलेे ही कुछ पता ना चले, लेकिन इससे आस पास में रहने वालों की नींद खराब होती हैं यह एक ऐसी समस्या है जो आपसे ज्यादा दूसरों को परेशान करती हैं। अगले दिन जब कोई आपके खर्राटों के बारे में टोकता है, तो यह वाकई में काफी शर्मिंदा भरा होता हैं। खर्राटो को लेकर ऐसा माना जाता हैं कि जब गले का पिछला हिस्सा जब संकरा हो जाता हैं और ऑक्सीजन उस रास्ते से होकर जाती हैं तब आसपास के टिश्यू वाइब्रेट करने लगतेे है। इसी वजह से खर्राटे आते हैं। तो
आज हम आपको खर्राटो से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू उपचार के बारे में बताएंगे।

  • खर्राटो (Snoring) का कारण 
  • नाक की हड्डी का टेड़ा हो जाना।
  • नाक में मांस का बढ़ जाना।
  • मोटापा- वजन बढ़ जाने से भी खर्राटें आने लगते है, जब किसी का वजन बढ़ता है तब उसके गले का मांस लटकने लगता हैं। लेटते समय इस अतिरिक्त मांस के कारण सांस की नली दब जाती हैं और सांस लेने में दिक्कत आने लगती हैं। इसी वजह से खर्राटे आने लगते है।
  • कई लोगो की जीभ की मोटाई बढ़ जाने के कारण भी खर्राटे आने लगते है।
  • खर्राटो (Snoring) का लक्षण
  • सोते सोते सांस ना आना और हड़बड़ा के उठ जाना।
  • तेज आवाज के साथ सांस लेना और छोड़ना।
  • सांस लेने की रफ्तार और समय बढ़ना।
  •  नींद पूरी होने पर भी सारे दिन नींद आना।
  • सारे दिन आलस्य बना रहना।
  • सारे दिन थकान महसूस होना।
  • खर्राटो (Snoring) का घरलू उपचार
  • जैतून- जैतून के तेल में सुजनरोधी गुण पाये जाते हैं साथ ही इस तेल में मौजूद तत्व सांस लेने में आने वाली परेशानी को दूर करते हैं। रात को सोने से पहले इस तेल का सेवन शहद के साथ करने से खर्राटो में फायदा होता हैं।
  • हल्दी- यह एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक से भरपूर होती हैं। हल्दी नाक की झिल्ली की सूजन को कम करती है साथ ही खर्राटो को भी कम करने में मदद करती हैं। गर्म दूध में हल्दी पाउडर मिला के सोने से पहले पिये, इस उपाय को रोजाना करने से खर्राटो की समस्या दूर हो जाएगी।
  • पुदीना- एक गिलास पानी मे 2 बूंद पुदीने के तेल की डाले ओर सोने से पहले इस मिश्रण से गरारे करें, लेकिन इस मिश्रण को निगलना नही हैं। इस प्रक्रिया को रोज करने से आपको खर्राटो में अच्छा परिणाम मिल जाएगा। 
  • इलायची- इसमे एंटीऑक्सीडेंट और एन्टी इंफ्लामेटरी गुण पाये जाते हैं। रात को एक गिलास पानी मे इलायची को उबाले और हल्का गुनगुना होने पर इसे पिये। ऐसा करने पर खर्राटो  की समस्या दूर हो जाती हैं।
  • खर्राटे दूर करने के लिए निम्न बातो का ध्यान रखें। 
  • वजन कम करें।
  • पीठ के बल सोने के बजाय करवट लेके सोएं।
  • सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा करके सोएं, इससे जीभ ओर सांस की नली में रुकावट नही आएगी।
  • गले की रेग्युलर एक्सरसाइज करें।
  • रात के समय हल्का भोजन करें।
  • योग - सभी प्रकार के रोगो मे योग प्राक्रतिक चिकित्सा के रूप मे काम करते है। घरेलू उपचार ले साथ- साथ योग भी खर्राटो में उपयोगी होता हैं। योग जैसे- अनुलोम-विलोम, कपालभाति, सिंंहासन,भ्रामरी आदि। सभी योग, योग गुुुुरु की सलाह से करेें।

Monday, 30 September 2019

Unwanted hair ( Hirsutism ) Treatment In Ayurveda

  • Unwanted Hair ( Hirsutism ) 
अनचाहे बालों की वजह से आपके चेहरे की खूबसूरती कम हो सकती हैं। यह समस्या महिलाओं के साथ पुरूषों को भी होती हैं। पुरुषो को होना ये आम बात हैं। लेकिन महिलाओं को इन अनचाहे बालों की वजह से शर्मिंदा होना पड़ता हैं।
ये अनचाहे बाल चेहरे की सुंदरता को कम कर देते है इसलिए इन बालों को हटाने का भरपूर प्रयास करते है लेकिन यह दुबारा आ जाते हैं। आयुर्वेद की मदद से अनचाहे बालों से निजात मिल सकता हैं, साथ ही आपके चेहरे की सुन्दरता को भी बढ़ाएगा तथा किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नही होता हैं।

  • Unwanted hair ( Hirsutism) होने के कारण व लक्षण
  • PCOS ( Polycystic Ovary Syndrome) - यह Unwanted hair ( Hirsutism ) का सामान्य कारण हैं।
  • Testosterone  सहित Androgen से अधिक सामान्य स्तर के कारण महिलाओं के चेहरे और शरीर के अन्य हिस्से में अनचाहे बाल आने लगते हैं। 
  • अनुवांशिकता - यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है, अगर आपकी माँ, बहन, या किसी अन्य महिला रिश्तेदार के अनचाहे बालों में वृद्धि हो तो आपके भी होने की संभावना अधिक होती हैं।
  • मोटापा (obecity)
  • Unwanted Hair ( Hirsutism ) का आयुर्वेदिक उपचार 
  • हरताल 10 ग्राम, मैनसिल 10 ग्राम, बुझा चुना 10 ग्राम को निम्बू के रस (30- 50 ml) में मिला धूप में सुखा लें उसके बाद उसे अच्छे से घोट कर महीन चूर्ण कर ले और उसे किसी प्लास्टिक या कांच की शीशी में भर कर रख लें। 
  • जब भी आपको उपयोग करना हो तब इस चूर्ण को लेवे ओर इसमे गुलाब जल मिला कर इसका पेस्ट तैयार कर लें और इसे अपने चेहरे पर लगाए ।
  • जब यह अच्छे से सुख जाए तब इसे गुनगुने पानी से धो लें, यह प्रकिया एक सप्ताह में 3 बार करें । इससे अनचाहे बालों से छुटकारा मिलेगा। 
  • कैक्टस (नागफनी) के दूध का उपयोग अनचाहे बालों को हटाने में किया जाता हैं। वैक्सीन के द्वारा अनचाहे बालों को जड़ो से निकलने पर उस जगह नागफनी के दूध लगाना चाहिए। दूध लगाते समय आंखों और मुँह को बचा के रखें।
  • Unwanted Hair ( Hirsutism ) का घरेलू उपचार
  • कच्चे पपीते को छील कर छोटे-छोटे टुकड़े करने के बाद इनको पीसकर पेस्ट बना ले। इस पेस्ट में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर चेहरे पर जहाँ बाल हैं वहाँ लगाने के बाद 15 से 20 मिनट तक मालिश करे। चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। यह प्रक्रिया हफ्ते में 2 बार कर सकते हो जिससे अनचाहे बालों से निजात मिलेगा साथ ही चेहरे की सुंदरता बढ़ेगी।
  • संतरे और निम्बू के छिलके को धूप में सुखा कर इसका चूर्ण बना ले और इसमें जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर 5 से 10 मिनट तक मालिश करें। यह भी अनचाहे बालों को हटाने में मदद करेगा। 
  •  प्याज और तुलसी के पत्तो का पेस्ट बनाकर अनचाहे बालों पर लगायें। इस पेस्ट को 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दे, उसके बाद पानी से धो लें। इससे भी अनचाहे बालों से निजात मिलेगा।

Tuesday, 11 September 2018

Leucorrhea (white Discharge) Treatment In Ayurveda

  • Leucorrhea (white Discharge)
Leucorrhea जिसे आम भाषा मे white Discharge कहते हैं। इसे ही आयुर्वेद में श्वेत प्रदर कहा जाता है। यह महिलाओं में होंने वाला रोग है। इस रोग में योनि मार्ग से श्वेत, पिले, हल्के लाल रंग का चिपचिपा गाढ़ा ओर बदबूदार स्त्राव होता है। लेकिन ये स्त्राव अधिकतर श्वेत रंग का होता है इसी कारण इसे श्वेत प्रदर कहते हैं।

Leucorrhea महिलाओं में होने वाली आम समस्या है,जो महिलाओं में पीरियड्स के पहले ओर बाद में सामान्य रूप से होती है। यह समस्या लम्बे समय तक बनी रहने की वजह से गुप्तांगो में जलन, खुजली ओर बेचैनी होती है, अगर ऐसी समस्या रहे तो इसका इलाज अवश्य लेना चाहिए।

इस रोग को नजरअंदाज करने पर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है,जो जननांगों ओर प्रजनन से संबंधित रोगों का कारण भी बन सकती है। हम इस पोस्ट के जरिए आपको इसके कारण, लक्षण,ओर उपचार के बारे मे जानकारी देंगे।

  • Leucorrhea (White Discharge) के कारण
  • मूत्र मार्ग में संक्रमण
  • योनि में फंगल संक्रमण
  • खून की कमी
  • योनि को ठीक प्रकार से साफ ना रखना
  • शरीर मे रोगप्रतिरोधक क्षमता का कम होना
  • गलत तरीके से संभोग
  • तेज मिर्च मसाले व तले हुए भोजन का अधिक सेवन
  • ज्यादा गर्भ निरोधक दवाओं का सेवन
  • बार बार गर्भपात के कारण
  • पोषण की कमी
  • Leucorrhea (White Discharge) के लक्षण
  • कमजोरी महसूस होना
  • हाथ पैरों ओर कमर में दर्द होना
  • चक्कर आना
  • शरीर मे भारीपन लगना
  • चिड़चिड़ापन, जी मचलाना
  • भूख ना लगना
  • आखों के नीचे काले घेरे होना
  • योनि भाग में खुजली होना
  • पेट मे भारीपन
  • शौच साफ न होना, बार बार पैशाब आना


  • Leucorrhea (white Discharge) का आयुर्वेदिक उपचार
  • पुष्यनुग चूर्ण- यह चूर्ण Leucorrhea के लिए रामबाण औषधि है। इस चूर्ण को रोज सुबह शाम 1-1चम्मच लेने से Leucorrhea रोग से छुटकारा मिलता है।
  • लोध्र- योनि में संक्रमण के लिए लोध्र चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है, इस चूर्ण की रोज 1-1 चम्मच सुबह शाम लेने से संक्रमण के साथ साथ Leucorrhea में फायदा होता है।
  • प्रदान्तक लौह- इसके उपयोग से हाथ पैरों ओर कमर में होने वाले दर्द को आराम मिलता है साथ कि अनियमित मासिक धर्म नियमित हो जाता है ओर साथ ही Leucorrhea रोग से छुटकारा मिलता है।
  • अश्वगन्धा- इस चूर्ण के सेवन से शरीर मे होने वाली कमजोरी दूर होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • Leucorrhea (White Discharge) के घरेलू उपचार
  • अनार का रोज सेवन करे, इसके दाने ओर रोज इसका रस पीने से Leucorrhea में आराम मिलता है।
  • भुने हुए चने को रोज अपनी डाइट में इस्तेमाल करने से वाइट डिस्चार्ज में फायदा होता है।
  • अंजीर भी वाइट डिस्चार्ज में बहुत ही उपयोगी है,रात को अंजीर भिगो के रख देवे उसे सुबह खाली पेट खाने से वाइट डिस्चार्ज में फायदा होता है।
  • दही का सेवन अपने खाने में रोज करे, दही में रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता होती है,संक्रमण से बचाता है।
  • फिटकरी के पानी से रोज योनि को दिन में 2 बार साफ करे जिससे किसी प्रकार का संकमण ना हो।
  • योग
  • योग सभी रोगों में प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में काम करता है, Leucorrhea में आयुर्वेदिक उपचार के साथ साथ योग करने से भी Leucorrhea से छुटकारा पा सकते है। योग जैसे- अनुलोम विलोम, नोकासन, भ्रामरी, शलभासन करे ये सभी योग, योग गुरु से प्रशिक्षण के बाद करे।

Monday, 3 September 2018

Fatty Liver (Hepatomegaly) Treatment In Ayurveda

  • Fatty Liver (Hepatomegaly)
Liver हमारे शरीर का सबसे मुख्य अंग होता है, यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रथि हैं। Liver में सामान्य तौर Fat का होना आम बात होती है, लेकिन यह Liver के कुल वजन का 5 से 10% हो जाये, तो Fatty Liver Disease होने की संभावना बढ़ जाती है। जिसे Hepatomegaly कहा जाता है।

Liver हमारे शरीर की एक छलनी होती है जो पचित भोजन से आये हुए नुकसानदायक प्रदार्थो को रोक लेता है ताकि वो शरीर के बाकी अंगों तक नही पहुँच पाए। इस प्रकिया से हमारे बाकी अंग सुरक्षित रहते हैं। ज्यादा Fat का जमा होने Liver के function को प्रभावित करता है जिससे शरीर न के बराबर काम करने लगता है।

इस बीमारी का पता चलने पर इलाज कराना जरूरी है नही तो Liver को नुकसान हो सकता है, हम पोस्ट के जरिये आपको इसके लक्षण, कारण ओर उपचार के बारे में बताते है।
  • Fatty Liver (Hepatomegaly) के लक्षण
  •  Liver का साइज बढ़ जाना
  • भूख ना लगना
  • थकान लगना
  • पेट के ऊपरी हिस्से या बीच मे दर्द होना
  • जी मिचलाना
  • शरीर मे कमजोरी
  • गर्दन और बाहों के नीचे काले धब्बे हो जाना
  • जीभ पर मेल जम जाना
  • कब्ज
  • Fatty Liver ( Hepatomegaly) के कारण
  • मोटापा (पेट पर)
  • अनुचित आहार
  • शराब का सेवन
  • डियाबिटीज
  • कॉलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर
  • आनुवंशिक
  • ज्यादा तेलिये प्रदार्थो का सेवन
  • Fatty Liver (Hepatomegaly) का आयुर्वेदिक उपचार
  • कंटकारी- कंटकारी Liver ओर Spleen के Enlargment को कम करने में सहायता करता है। कंटकारी के चूर्ण की 1-1 चम्मच सुबह शाम लेने से आराम मिलता है
  • ग्वारपाठा- यह आम तौर सभी जगह उपलब्ध होता है, इसको लेकर पानी से अच्छे से धो ले तथा इसके अंदर वाले हिस्से में काला नमक और अदरक मिलाकर रोज सुबह सुबह सेवन करने से Hepatomegaly में आराम मिलता है।
  • कुटकी- कुटकी liver से सम्बंधित बीमारियों में बहुत ही फायदेमंद होती है, इसके जड़ का चूर्ण लेकर रोज सुबह शाम 1-1 चम्मच शहद के साथ लेने से Hepatomegaly की समस्या दूर हो जाती है।
  • अरोग्यवर्धनी वटी- इस वटी का सेवन रोज सुबह शाम करने से Hepatomegaly में बहुत अधिक फायदा होता है।
  • Fatty Liver (Hepatomegaly) के घरेलू उपचार
  • करेला Fatty liver के बहुत ही उपयोगी होता है हर रोज करेले की सब्जी और इसका जूस पीने से आराम आराम मिलता है।
  • Fatty liver में विटामिन सी एक अच्छा घरलू उपचार है, अच्छे परिणाम के लिए रोज खाली पेट निम्बू ओर संतरे का जूस पिये।
  • रोजाना खाली पेट पके हुए जामुन खाने से Hepatomegaly की समस्या में आराम मिलता है।
  • रोज कच्चा टमाटर का उपयोग करे इससे भी फैटी लिवर की समस्या दूर हो जाती है।
  • योग
  • योग बहुत ही अच्छा उपाय है, fatty liver से बचने के लिये रोज योग करे, जैसे- सूर्य नमस्कार, कपाल भाती, सर्वांगासन, भुजंगासन आदि। योग बहुत ही सावधानी से ओर योग गुरु से प्रशिक्षण के बाद करे।

Monday, 27 August 2018

Thyroid Treatment In Ayurveda

  • Thyroid
Thyroid गले मे पाये जानेे वाली ग्रन्थि होती हैं। यह गले के आगे वाले हिस्से में वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागो में पाई जाती हैं, इसका आकार तितली के समान होता हैं। इससे थायरोक्सिन हॉर्मोन बनता है,इस हॉर्मोन के संतुलन बिडग जाने से यह रोग हो जाता है।

थाइराइड शरीर की Metabolic क्रिया को नियंत्रित करता है। इसके साथ ही यह आयोडिन का उपयोग करके आवश्यक थाइराइड हॉर्मोन्स बनाता है ओर शरीर के सभी हिस्सों तक पहुँचता है।

थाइराइड की समस्या महिलाओं में ज्यादा होती है। महिलाओं में यह रोग समय के साथ बढ़ता जाता है तथा कई बार इसके लक्षण पता होने तक इस रोग की शिकार हो चुकी होती है क्योकि इसके लक्षण समझ मे ही नही आते हैं। सबसे सामान्य थायराइड प्रॉब्लम होती है वो है थायराइड हॉर्मोन्स का सही मात्रा में प्रोडक्शन ना होना।
  • यह दो प्रकार का हो जाता है।
  • हाइपो थयरोइडिस्म
  • इस अवस्था मे व्यक्ति के शरीर मे थायरोक्सिन का स्त्राव अवश्यकता से कम होने लगता है।
  • हाइपर थायरोइडिस्म
  • इस अवस्था मे व्यक्ति के शरीर मे थयरोक्सिन का स्त्राव आवश्यकता से अधिक होने लगता है।
  • Thyroid के कारण
  • दवाइयों के ज्यादा इस्तेमाल ओर उनका साइड इफेक्ट से थायराइड की समस्या हो जाती है।
  • शरीर मे आयोडीन की मात्रा कम या ज्यादा होने पर भी थायराइड रोग हो जाता हैं।
  • आनुवंशिक कारण
  • ज्यादा तनाव लेने से थायराइड ग्लैंड पर असर पड़ता है।
  • गर्भावस्था के समय हॉर्मोन्स के परिवर्तन इस कारण भी थायराइड की समस्या हो जाती है
  • प्रदूषण भी थायराइड का कारण हो सकता है।
  • Thyroid के लक्षण
  • वजन बढ़ना
  • जल्द थकान महसूस होना
  • त्वचा और नाखून का रूखापन होना
  • यादाश्त कमजोर होना
  • मांसपेसियों ओर जोड़ो में दर्द होना
  • आंखों में सूजन आना
  • पीरियड्स में बदलाव आना
  • Thyroid का आयुर्वेदिक उपचार
  • कचनार- कचनार थायराइड के उपचार के लिए बहुत ही लाभकारी है। कचनार की छाल को लेकर उसका काढ़ा तैयार कर लेवें, उसे दिन में 2 से 3 बार लेते रहे। ऐसा रोज करते रहने से थायराइड से छुटकारा मिल जाता है।
  • अश्वगन्धा- अश्वगन्धा के चूर्ण का 1 चम्मच रोज सुबह शाम दूध के साथ लेने से थायराइड में फायदा होता है।
  • मुलेठी- मुलेठी के सेवन से थायराइड ग्रंथि में संतुलन बना रहता है। मुलेठी के सेवन करते रहने से थायराइड से होने वाली थकान दूर होती है और साथ ही थायराइड की समस्या से छुटकारा मिलता है।
  • ब्राह्मी- ब्राह्मी थायराइड को उत्तेजित करने में मदद करता है, इसके निरंतर उपयोग से थायराइड में आराम मिलता है।
  • Thyriod का घरेलू उपचार
  • थायराइड की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दूध ज्यादा से ज्यादा पिये, थायराइड में दूध बहुत ही असरकारक होता है।
  • लौकी का जूस थायराइड में बहुत ही फायदेमंद होता है, इसे रोज सुबह खाली पेट पिने से थायराइड की समस्या दूर हो जाती है।
  • नारियल पानी थायराइड को नियंत्रित करता है, रोज नारियल पानी पीने से थायराइड में आराम मिलता है।
  • काली मिर्च के सेवन से थायराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। इसका सेवन आप किसी भी प्रकार से कर सकते है।
  • विटामिन ए थायराइड को कम करने में मदद करता है। हरी पत्तेदार सब्जियों ओर गाजर आदि में विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है।
  • योग
  • योग यह प्राकतिक उपचार होता है, योग शरीर मे किसी भी रूप में फायदा पहुँचता है। योग करने से थायराइड से छुटकारा मिल जाता है। रोज सुबह 20 से 30 मिनट तक योग करने से थायराइड की समस्या पूर्णतया दूर हो जाती है। योग, योग गुरु से प्रशिक्षण लेने के बाद करे। यह योग निम्न है- मत्यासन, हलासन, विपरीत कर्णी आदि।

Friday, 24 August 2018

Cervical Pain (गर्दन दर्द) का पूर्ण इलाज

  • Cervical Pain (गर्दन का दर्द)
सर्वाइकल पैन यानि गर्दन का दर्द जो Cervical Spondylosis के नाम से भी जाना जाता है। यह दर्द आम तौर पर गर्दन को झुकाकर काम करने वालो को अधिक होता है। दिन भर बैठे रहना,सीधा ना चलना, आदि की वजह से हमारी गर्दन में दर्द होने लगता है।

यह दर्द गर्दन के निचले हिस्से ओर कंधो के जोड़ो में होने लगता है। इससे गर्दन घुमाने में परेशानी होती है। सर्वाइकल पैन से अधिक उम्र के व्यक्तिओं के साथ साथ छोटे उम्र के बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।

इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी के डिस्क के बीच की जगह कम होने लगती है ओर नाड़ी पर दबाव बढ़ने लगता है। जिससे जहाँ से होकर ये नाड़ियां जाती है, वहा पर भी दर्द और झुनझुनाहट होने लगता है। सर्वाइकल के इस दर्द को नजरअंदाज करने पर ये दिनों दिन बढ़ता जाता है। इस पोस्ट के जरिये आपको हम इसके बारे में जानकारी देंगे।
  • Cervical Pain (गर्दन का दर्द) का कारण
  • लम्बे समय तक गर्दन को झुकाये रखना
  • लम्बे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से 
  • ज्यादा ड्राइविंग करना ओर भारी हेलमेट पहनने रखना
  • ऊचे तकिये का प्रयोग करना
  • शरीर मे कैल्शियम और विटामिन डी की कमी होना
  • उम्र के बढ़ने के साथ साथ हड्डियों को क्षय होना
  • शारीरक श्रम का अभाव
  • ज्यादा भारी वजन सिर पर उठाने से सर्वाइकल पैन होता है
  • गर्दन पर अधिक तनाव आना
  • रीढ़ की हड्डी पर चोट आ जाना।
  • मोटापा आदि।
  • Cervical Pain (गर्दन का दर्द) का लक्षण
  • सिर का दर्द
  • गर्दन में दर्द के साथ चक्कर आना
  • गर्दन ओर कंधो में कड़ापन महसूस होना
  • गर्दन के हिलाने पर पीसने जैसी आवाज आना
  • हाथ ओर उंगलियो में सुन्न हो जाना
  • गर्दन के आस पास की नसों में सूजन का आना
  • खाँसते ओर छीकते समय गर्दन में दर्द होना
  • Cervical Pain (गर्दन का दर्द) का आयुर्वेदिक उपचार
  • महानारायण तेल- यह तेल सर्वाइकल के दर्द में आराम देता है, इस तेल की दिन में 2 से 3 बार मालिश रोजाना करते रहे दर्द में काफी हद तक आराम मिलता है।
  • दशमूल तेल- दशमूल तेल जोड़ो के दर्द के लिए बहुत उपयोगी होता है, इस तेल को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह हल्की मालिश करने से दर्द में तुरन्त आराम मिलता है।
  • त्रिफला चूर्ण- इस चूर्ण की रोज 1 चम्मच सुबह शाम लेने से सर्वाइकल पैन मे आराम मिलता है  
  • सिंघनाद गुग्गलु- सिंघनाद गुग्गलु जोड़ो के दर्द के लिए काफी असरदार माना गया है,सिंघनाद गुग्गलु की 2-2 गोली सुबह शाम रोज लेते रहने से सर्वाइकल पैन में आराम मिल जाता है।
  • Cervical Pain (गर्दन का दर्द) का घरेलू उपचार
  • सही तरीके के सोना चाहिए, सोते समय बिस्तर ज्यादा मुलायम ना हो तथा तकिया ज्यादा ऊँचा नही होना चाहिए, इन सब तरीको से आप सर्वाइकल पैन से बच सकते हैं।
  • सरसो ओर लोंग के तेल को अच्छे से मिक्स करके मालिश करने से भी दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • दर्द को कम करने के लिए ठंडा ओर गर्म सेक करते रहे इससे भी सर्वाइकल के दर्द में आराम मिलता है।
  • सर्वाइकल पैन का कई बार तनाव कारण हो जाता है, इसलिए जितना हो सके तनाव को कम करने की कोशिस करे।
  • लहसुन को सरसों के तेल में गर्म करके दर्द की जगह मालिश करने से वह दर्द और सूजन दोनो को कम हो जाते हैं।
  • योग
  • सर्वाइकल पैन से बचने के लिए योग एक प्राकृतिक उपाय है।निरन्तर योग करते रहने से शरीर मे लचीलापन बना रहता है ओर मन को शांति मिलती है। सर्वाइकल पैन के लिए विभिन्न योग जैसे- मत्स्यासन, धनुरासन, भुजंगासन आदि योग करना चाहिए, ध्यान रहे यह सभी योग, योग गुरु से प्रशिक्षण के बाद करे।

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